Aalsi Bandar Ki Kahani | आलसी बंदर की कहानी



एक बूढ़ी बंदरिया सैदपुर गांव के जंगल में रहती थी, वह अपने दो बच्चों के साथ रहती थी. एक का नाम चीकू था और दुसरे का नाम मीकु था चीकू बहुत ही आलसी था.




वह अपने दोनों बच्चों से बहुत प्यार करती थी और उनका ध्यान रखती थी और वह उनके लिए स्वादिष्ट फल लाती थी


बूढ़ी बंदरिया कहती है = देखो ! में तुम दोनों के लिए केले लाई हु

आलसी बंदर चीकू = ओह ! वाव सबसे पहले में लूँगा

मीकु = नही नही ! मुजे पहले दो

बूढ़ी बंदरिया = शांति बनाये रखो ! में तुम दोनों को दूंगी


मीकु कहता है = मोम ! ये स्वादिष्ट फल कहा से लाते हो?

बूढ़ी बंदरिया = जब तुम बड़े हो जाओगे और पेडो पर चड़ना सिख जाओगे, तब में तुम्हे एसी जगहे बताउंगी जहा स्वादिस्ट फल मिलते है!

मिकु =  ठीक है मोम । 

( इस तरह समय बीतने के साथ चीकू और मीकू बड हुए ।) 



बूढ़ी बंदरिया  =तुम दोनों अब बड़े हो गए हो। मैं चाहती हूं कि आप दोनों मेरे साथ आकर भोजन की खोज करना सीख ।ताकि आप अपना भोजन स्वयं ढूंढ सके और अपना पेट भर सके। 

मिकू= हां हां मैं बेसब्री से इस दिन का इंतजार कर रहा था।

चीकू= नो मोम। में नहीं जाऊंगा मुझे ठीक नहीं लग रहा।

बूढ़ी बंदरिया = ठीक है बेटा । कोई बात नहीं मैं तुम्हारे लिए फल ले आऊंगी । 

(  चीकू को बिना मेहनत के खाना मिलने लगा। इस तरह वह और भी आलसी हो गया )



बाद में जब उसकी बूढ़ी मां ने उसे अपने साथ जंगल ले जाने को कहा तो वह कोई ना कोई बहाना बना लेता था । 

बूढ़ी बंदरिया = बेटा चीकू आज तुम  मेरे साथ चलोगे ? 

चीकू = ओह मां मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे है। जंगल से खाना लाना कौन सी बड़ी बात है तुम सिर्फ मुझे परेशान करना चाहती हूं। 



बूढ़ी बंदरिया = कोई बात नही, तुम आराम करो।

( बूढ़ी मां को पता चलता है कि बहाना बनाना अब चीकू की आदत हो गई है ,वह आलसी हो गया है। अगर वह अभी नहीं सुधरा तो उसे भविष्य में बहुत बुरे समय का सामना करना पड़ सकता है ।और इसलिए बूढ़ी मां को अपने बेटे की चिंता सताने लगी ,लेकिन चीकू ऐसी बातें करता है कि उसकी मां उसके साथ ले जाकर उसे परेशान करना चाहती है। इस दौरान ,एक दिन बूढ़ी मां मर जाती है ।और फिर मीकु अपने भाई चीकू को समझाता है ।


मिकु= देखो ? अब हमारी मां नहीं रही,अब सबकुछ हमे अपने आप करना है। 

चीकू= हे! तुम मेरे भाई हो मुझे कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है ,जब तक तुम मेरे साथ हो। 

मिकु= तुमने ठीक कहा , किंतु तुम्हें अपनी जिंदगी जीने के लिए स्वतंत्र होना आवश्यक है। मैं तुम्हें कब तक सहायता करूंगा। 

चीकू= अब तुम मुझे पढ़ाना बंद करो। यदि तुम मेरे लिए जंगल से  खाने के लिए भोजन लाते हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम कोई महान बन गए ,हां हां पागल। 

( चीकू को यह सब सुनकर बहुत बुरा लगा किंतु वह अपने आलसी  भाई को अकेला नहीं छोड़ सकता ।इसलिए वह अपने आलसी भाई को साथ रखता है ,और उसके लिए खाना लाता है।  चीकू किसी बात की चिंता नहीं करता और वह बिल्कुल मीकू पर ही निर्भर रहता ) 

मिकु कहता है = हैं! चीकू, तुम कहा हों मैं तुम्हारे लिए अमरूद आया हूं ।जल्दी आओ। 

( चीकू खुश होता है ,और अपने भाई द्वारा लाए गए गुआवा खाने लगता है।) 

मिकु= ये मुझे बहुत ही अच्छे लगे , यह बहुत स्वादिष्ट है। 

मिकु = कुछ फल खुद से लाने की कोशिश करो।

( कुछ दिनों बाद एक शक्तिशाली शेर जंगल में आता है वह किसी भी बंदर को देखते ही उस पर हमला करता है और उसे मार डालता है।) 



मिकु = देखो, एक खतरनाक शेर जंगल में आया है उससे दूर रहना जब तक मैं खाना लाता हूं तुम उस से सावधान रहना।) 

चीकू= ठीक है ! तुम्हे मेरे बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं ।

( मिकु पेड़ से नीचे उतरा, और खाने की तलाश में कुछ दूरी तक गया , जाते-जाते शेर उसका पीछा करने लगा।) 

मिकु चिल्लाते हुए = में मर जाऊंगा,ये मुझे मारना चाहता है। 

( मीकू पेड़ पर चढ़कर अपने आप को किसी न किसी तरह बचाता है ,किंतु शेर पेड़ के नीचे मीकू के उतरने का इंतजार करता है ।) 



मिकु= ये सेर कब जाएगा,में अब घर कैसे जाऊंगा ? 

( इस तरह सूरज ढल जाता है ,लेकिन शेर वहां से नहीं हटता जिसके कारण मीकू अपने घर नहीं जा पाता दूसरी ओर ,चीकू भूखा अपने भाई का इंतजार करता है किंतु वह स्वयं खाने की कोशिश नहीं करता ।) 

चीकू अपने आप से कहता है = मैं नहीं जानता मेरे भाई के साथ क्या हुआ? अगर मैं गलत नहीं हूं तो मुझे लगता है वह जानबूझकर घर नहीं आ रहा होगा मैं सुबह से भूखा हूं । अब मुझे क्या करना चाहिए भगवान ? 

( चीकू सारी रात भूखा रहता है और मिकु के सुबह आते ही मीकु द्ववारा लाये गए फल खाने लगता है ।) 

चीकू= तुम्हें पता है मैं तुम्हारे कारण सारी रात भूखा रहा।

मिकु= तुम केवल भूखे थे मेरी जिंदगी बिल्कुल ही खतरे में थी। 

चीकू= सच्ची ? कल रात तुम्हारे साथ क्या हुआ ?

( मिकु  पूरी कहानी बताता है ,सारी कहानी के बाद में को कहता है।) 

मिकु= इसलिए मैं कहता हूं कि तुम्हें कुछ काम अपने आप भी करना चाहिए जिससे कि कठिन समय में तुम  कुछ कर सको ।

चीकू= सब कुछ ठीक है भाई ।

( इस तरह समय बीतता गया और बारिश का सीजन आया और काफी बारिश होने लगी।) 



चिकू= भाई ! मुझे भूख लगी ।

मिकु= मैं क्या कर सकता हूं बहुत ही लंबे समय से बहुत बारिश हो रही।

चीकू= भाई क्या बारिश में खाने के लिए बाहर नहीं जा सकते ?

मिकु= हमें बारिश रुकने तक इंतजार करना होगा।

( दोनों ही बिना भोजन और पानी की बारिश रुकने का इंतजार करने लगते हैं, रात हो जाती है किंतु बारिश नहीं रुकती जब वे उठे तो उन्होंने जंगल में बाढ़ देखी और अभी भी बारिश हो रही थी ।) 

मिकु= हैं भगवान ,जंगल मैं बाढ़। अब क्या करें ?

( अपने भूखे भाई की हालत देखकर मिकू  खुद पर काबू नहीं रख पाया ,और खाने की तलाश में निकल पड़ा।) 

मिकु= तुम अपना ध्यान रखना मैं खाने की तलाश में जा रहा हूं। 

चीकू= मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा भाई।

मिकु= नहीं अभी नहीं ,बाहर बहुत खतरा है ।मैं जल्दी खाने की व्यवस्था करके लौटूंगा ।

( मीकू खाने की तलाश में जाता है, किंतु वापस नहीं लौटता।) 

चीकू= यह कहां गया ?बहुत देर हो चुकी है ।मैं भूख के मारे कारण मरने वाला हूं ।अगर मुझे खाना तलाश करने का अनुभव होता तो मैं स्वयं चला जाता।

( चीकू को इस बात का बहुत पछतावा है ,कि वह हमेशा दूसरों पर निर्भर रहता था ।उसने कभी भी चीजों को अपने आप पाने की कोशिश नहीं की जिसके कारण वह आज मुसीबत में है ।) 

( कुछ दिनों से लगातार भूखे प्यासे रहने के कारण चीकू की हालत खराब हो गई, उसे फिर से एक और रात भुखा  सोना पड़ा ।और वह अपनी अगली सुबह नहीं देख पाया ।) 



( इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है ,कि हमें कभी भी किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।)